उदयपुर पर्यटन स्थल राजस्थान

उदयपुर पर्यटन स्थल राजस्थान

विश्व के सबसे सुंदर शहरों में गिना जाने वाला उदयपुर पर्यटन स्थल राजस्थान, भारत के राजस्थान में स्थित उदयपुर शहर झीलों की नगरी के नाम से प्रसिद्ध है। यह शहर समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊंचाई पर बसा हुआ है। इस शहर का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। मेवाड़ पर मुग़लों के हो रहे आक्रमणों से बचने के लिए, तथा एक सुरक्षित राजधानी बनाने के लिए चारों तरफ अरावली पहाड़ियों व जिलों से गिरे हुए एक समतल स्थान पर उदयपुर शहर बसाया गया।

इससे पहले मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़गढ़ थी, परंतु वह स्थान तीन ओर से समतल जमीन से गिरा हुआ था, इसलिए असुरक्षित था। वहां पर अलाउद्दीन खिलजी व अन्य मुग़लों ने आक्रमण किए इसी खतरे को देखते हुए मेवाड़ की नई राजधानी उदयपुर को बनाया गया। शहर के स्वर्णिम इतिहास को बयान करती ऐतिहासिक धरोहरें यहां महाराणा प्रताप संग्रहालय में सुरक्षित रखी हुई हैं।

उदयपुर का इतिहास

मेवाड़ के राजा बहुत ही शूरवीर थे, उन्होंने कभी भी मुग़लों की अधीनता स्वीकार नहीं की। मेवाड़ की प्राचीन राजधानी चित्तौड़गढ़ थी। चित्तौड़गढ़ पर अलाउद्दीन खिलजी व मुग़लों के आक्रमण हुए 1303 और 1534 के आक्रमण के बाद मेवाड़ के महाराणा ने एक सुरक्षित राजधानी बसाने का निर्णय लिया। इसलिए सूर्यवंशी नरेश महाराजा उदय सिंह द्वितीय ने उदयपुर को बसाया।

महान महाराणा प्रताप इन्हीं के पुत्र थे, हल्दीघाटी के स्थान पर अकबर और महाराणा प्रताप का युद्ध हुआ महाराणा प्रताप ने कभी भी मुग़लों की अधीनता स्वीकार नहीं की, तथा भामाशाह की सहायता से अपने अनेक किले मुग़लों से छीन लिए, तथा राजपूती आन बान और शान को सदा बनाए रखा।

महाराणा प्रताप के बाद मेवाड़ के राजा महाराणा राज सिंह ने औरंगज़ेब से युद्ध किया। 18 वीं शताब्दी में आंतरिक फूट और मराठों के आक्रमणों का सामना करना पड़ा। 1818 ईस्वी में उदयपुर ब्रिटिश प्रभुता के अधीन हो गया। 1948 में राजस्थान राज्य में इसका विलय किया गया।

उदयपुर का निर्माण किसने करवाया?

झीलों की नगरी उदयपुर का निर्माण महाराजा उदय सिंह ने करवाया इससे पहले उन्होंने पिछोला झील के किनारे उदय सागर झील का निर्माण करवाया। तथा 1559 में उदयपुर नगर बसाया। इससे पहले मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़गढ़ थी, मुग़लों के आक्रमण से बचने के लिए इस नगर को बसाया गया था।

उदयपुर की वास्तुकला

पिछोला, उदय सागर, व फतेह सागर जिलों से तीन ओर से घिरा हुआ यह शहर, वीरों झीलों और महलों का नगर है। यह नगर प्रकृति, कला, संस्कृति, साहित्य और गौरवशाली इतिहास का अनूठा संगम है। इस शहर की गिनती विश्व की सबसे सुंदर शहरों में की जाती है।

उदयपुर के अन्य उपनाम

पहाड़ों, झीलों, पेड़ पौधों से संपन्न शहर उदयपुर को अन्य  कुछ उपनाम इस प्रकार हैं।

  • झीलों की नगरी- यहां पर मीठे पानी की सर्वाधिक झीलें होने के कारण इसे झीलों की नगरी कहा जाता है।
  • राजस्थान का कश्मीर- यहां के अच्छे मौसम और सुंदरता के कारण इसे राजस्थान का कश्मीर कहते हैं।
  • सैलानियों का स्वर्ग- यहां वर्ष भर देश व विदेश से सैलानी आते रहते हैं, इसे उत्तर भारत के सबसे सुंदर शहरों में गिना जाता है।
  • फाउंटेन एंड माउंटेन सिटी- यहां पर पर्वतों झीलों बाग बगीचों के कारण इसे यह नाम दिया गया।
  • राजस्थान का वियना- इसकी तुलना ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना से की गई है। इस शहर को भारत का वियना और एशिया का वियना भी कहा जाता है।
  • पूर्व का वेनिस- वेनिस इटली का एक शहर है, जो टापुओं पर बसा हुआ है। उदयपुर की समानता इस शहर से की जाती है।
  • सितारों का शहर- इस शहर की रात्रि की सुंदरता के कारण इसे यह नाम दिया गया है।

प्रमुख झीलें

  1. पिछोला झील- यह झील सबसे सुंदर और प्राचीन झील है। इसका निर्माण पिछोली गांव में 1387 में राणा लाखा के काल में करवाया गया। इसका निर्माण चिड़ीमार और बिच्छूमार दो बंजारों द्वारा अपने मरे हुए बैलों की याद में करवाया था। इस झील के बीच में एक महल है। जिसका नाम जग महल है, और इसका निर्माण जगत सिंह द्वितीय ने करवाया था। इसी झील के अंदर एक मंदिर है, जिसे जग मंदिर या जग निवास मंदिर कहा जाता है। इसका निर्माण महाराणा करण सिंह ने करवाया तथा इसे महाराणा जगत सिंह प्रथम के काल में पूरा किया गया, जोकि करण सिंह के पुत्र थे।

    मुगल बादशाह जहांगीर के खिलाफ खुर्रम ने विद्रोह किया था। तथा उस समय खुर्रम को करण सिंह ने इसी जग मंदिर में शरण दी थी। बाद में खुर्रम शाहजहाँ के नाम से प्रसिद्ध हुआ माना जाता है कि, शाहजहाँ ने इसी महल में रहकर ताजमहल बनाने की कल्पना की थी। इसी झील के किनारे पर नटनी का चबूतरा है। इसके पास एक बागोर की हवेली है, जिसके अंदर पगड़ियों का संग्रहालय है। विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी इसी में संभाल कर रखी गई है, इसका निर्माण मेवाड़ के प्रधानमंत्री अमर चंद ने करवाया था।

  2. फतेहसागर झील- यह झील एक सुंदर नासपाती के आकार की झील है। इसका बांध लगभग 28 फीट लंबा है, तथा इसकी गहराई 30 मीटर है। इसके बीच अहमदाबाद की एक सौर वेधशाला की स्थापना 1975 में की गई है। इस झील के बीच में नेहरू पार्क है जो कि, 789 फीट लंबा तथा 292 फीट चौड़ा है। यहां पर नाव के द्वारा पहुंचा जा सकता है। इस झील के किनारे पर महाराणा प्रताप का स्मारक बहुत ही सुंदर दर्शनीय स्थल है।
  3. उदय सागर झील- इस झील का निर्माण महाराणा उदय सिंह ने उदयपुर की स्थापना के समय ही करवाया था। यह एक सर्पिल आकार की झील है।
  4. जयसमंद झील- यह झील एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। इसे ढेबर झील भी कहते हैं, इसका निर्माण मेवाड़ के राजा महाराणा जय सिंह ने करवाया था। इसमें गोमती नदी का पानी आता है। इस झील के बीच में 7 टापू हैं। जिन पर भील और मीणा जाति के लोग रहते हैं। जिनमें से सबसे बड़े टापू को बाबा का भांगड़ा कहा जाता है, और सबसे छोटे टप्पू को प्यारी टप्पू का जाता है।

उदयपुर दर्शनीय स्थल

उदयपुर मे दर्शनीय स्थल इस प्रकार से है ।

  1. जग निवास महल/ लेक पैलेस- यह महल पिछोला झील में स्थित है। इसका निर्माण महाराणा जगत सिंह द्वितीय ने करवाया था। यह बहुत सुंदर महल है, जिसे होटल में बदल दिया गया है। यहां तक नाव से पहुंचा जा सकता है।
  2. जग मंदिर पैलेस- यह महल पिछोला झील के दक्षिणी भाग में स्थित है। इसका निर्माण 1620 से 1628 के बीच महाराणा करण सिंह ने करवाया था। यहां पर महाराणा करण सिंह ने शहज़ादे खुर्रम जिन्होंने अपने पिता जहांगीर से विद्रोह किया था को शरण दी थी। तथा उनसे अपनी पगड़ी बदली थी, जिसका मतलब है कि वे अब मित्र हैं तथा जीवन भर एक दूसरे का सहयोग करेंगे। शहज़ादे खुर्रम बाद में जाकर शाहजहाँ कहलाए। इस महल तक नाव द्वारा पहुंचा जा सकता है, यहां ठहरने की अच्छी व्यवस्था है।
  3. सज्जनगढ़ पैलेस- उदयपुर के दक्षिणी भाग में महाराणा सज्जन सिंह ने एक पहाड़ी पर इस महल का निर्माण करवाया था। इसे मानसून पैलेस, वाणी विलास महल, उदयपुर मुकुट मणि आदि अन्य नामों से जाना जाता है।
  4. चंद्र महल/ सिटी पैलेस- यह महल राजस्थान का सबसे बड़ा महल है। यह पिछोला झील के किनारे पर बना हुआ है। इसका निर्माण महाराणा उदय सिंह ने 1559 में करवाया था। इस महल में प्रवेश के लिए प्रथम द्वार हाथी पोल है, जिसे 1752 में बनवाया गया था। इसके अंदर कई महल हैं, जैसे राय आंगन महल, मोती महल, दिल खुश महल, माणक महल, कृष्णा कुमारी महल तथा नव चौकी महल, इस नौ चौकी महल का निर्माण उदय सिंह ने करवाया था। यहां पर मेवाड़ के महाराणाओं का राजतिलक होता था।
  5. सहेलियों की बाड़ी- इसका निर्माण महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय ने 1710 से 1734 ईस्वी में करवाया था। इसमें फतेहसागर झील का पानी आता है। यहां पर सुंदर फूलों के बगीचे फव्वारे आदि बहुत सुंदर  स्थान है।

उदयपुर जिले के मंदिर

उदयपुर में बहुत से प्राचीन मंदिर हैं। जिनमें से कुछ प्रमुख जगत अंबिका मंदिर, एकलिंग नाथ का मंदिर, हरि हर मंदिर, जगदीश मंदिर, धाय मंदिर आदि कुछ प्रमुख हैं।

उदयपुर के अभ्यारण्य-  राजस्थान के सर्वाधिक अभ्यारण्य उदयपुर जिले में ही स्थित है। इस जिले में सज्जन गढ़ अभ्यारण्य, जयसमंद अभ्यारण्य, कुंभलगढ़ अभ्यारण्य, फुलवारी की नाल अभ्यारण्य स्थित है।

उदयपुर कैसे पहुंचे?

उदयपुर शहर पर्यटन की दृष्टि से व ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत ही संपन्न है। यहां वर्ष भर देश व विदेश से पर्यटक आते जाते रहते हैं। उदयपुर के किले, महल, ऐतिहासिक धरोहर,  इस स्थान के महापुरुषों के शौर्य का बखान करती हैं।  कुल मिलाकर उदयपुर उत्तर भारत का सबसे सुंदर पर्यटन स्थल है। उदयपुर रेलवे स्टेशन वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन है। यह शहर अब स्मार्ट सिटी बन चुका है। यहां के महाराणा प्रताप हवाई अड्डे से देश में कहीं भी आसानी से पहुंचा जा सकता है।

धन्यवाद

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