सी वी रमन का जीवन परिचय

सी वी रमन हिंदी निबंध मे आज हम आपको “सी वी रमन का जीवन परिचय” के बारे मे विस्तार से उल्लेख करेगे ।

सी वी रमन CV Raman

सी वी रमन का पूरा नाम चंद्रशेखर वेंकटरमन था। वे भारत के ऐसे महान वैज्ञानिक थे जिन्होंने भारत देश की वैज्ञानिक क्षमता को पूरे विश्व के सामने उजागर किया। आज विश्व मे हर शिक्षण संस्थान में सीवी रमन द्वारा खोजा गया, भौतिकी का सिद्धांत रमन इफेक्ट पढ़ाया जाता है। 7 नवंबर, 2020 को उनके जन्म की 132 वीं वर्षगांठ है। उनके द्वारा खोजे गए रमन इफेक्ट के सिद्धांत की खोज 28 फरवरी को की गई थी। इसलिए 28 फरवरी का दिन भारतवर्ष में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

सी वी रमन का जीवन परिचय

चंद्रशेखर वेंकटरमन का जन्म तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली नामक स्थान पर हुआ। उनका जन्म 7 नवंबर, 1988 को हुआ। उनके पिता का नाम चंद्रशेखर रामनाथ अय्यर था। जो कि एक गणित व विज्ञान के लेक्चरर थे। चंद्रशेखर वेंकटरमन की बचपन से ही विज्ञान में रुचि थी, और उनकी इस रूचि को और अधिक बढ़ाने का श्रेय उनके पिताजी को जाता है।

11 वर्ष की आयु में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की, तथा 13 वर्ष की आयु में उन्होंने FA की परीक्षा पास की। सन 1902 में उन्होंने मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया। जहां पर उनके पिताजी गणित व विज्ञान के लेक्चरर थे। 1904 में उन्होंने वहां से B.A. किया। वे फिजिक्स में गोल्ड मेडलिस्ट रहे। 1907 में उन्होंने अच्छे अंको से एम एस सी की परीक्षा पास की। 1907 में उनका विवाह लोक सुंदरी आमल से हुआ। उनकी दो संताने थी जिनका नाम चंद्रशेखर तथा राधाकृष्णन रखा गया।

1908-18 तक उन्होंने संगीत वाद्य यंत्रों जैसे सितार, ड्रम आदि की तरंगों का अध्ययन किया।

1917 ईस्वी में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी तथा कोलकाता कॉलेज में प्रोफेसर का पद स्वीकार किया, क्योंकि उनकी रूचि शुरू से ही भौतिकी विषय में रही थी। 1926 में उन्होंने इंडियन जनरल ऑफ फिजिक्स का पहला प्रकाशन किया, तथा उनका दूसरा आर्टिकल ए न्यू रेडिएशन प्रकाशित किया गया।

28 फरवरी, 1928 को के एस कृष्णन के साथ सी वी रमन ने एक एक्सपेरिमेंट किया जिसे रमन इफेक्ट के नाम से जाना जाता है। इस खोज के दिन को 28 फरवरी को हर वर्ष भारतीय विज्ञान दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

1929 में प्रोटॉन के न्यूक्लियस की खोज करने वाले रदरफोर्ड ने रॉयल सोसाइटी में सीवी रमन के सिद्धांत को बताया 1932 में रमन ने क्वांटम फोटोन स्पाइन की खोज की।

1933 में सी वी रमन ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बेंगलुरु में डायरेक्टर का पद ग्रहण किया। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय थे। बाद में उन्होंने वहां डायरेक्टर का पद छोड़ दिया। 1948 में उन्होंने वहां रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की, तथा वहां मुक्त रूप से खोज का कार्य जारी रखा।

21 नवंबर, 1970 को 82 साल की उम्र में सीवी रमन की हृदय की बीमारी की वजह से मृत्यु हो गई। उन्होंने अपनी मृत्यु के 1 दिन पहले भी रिसर्च कार्य के लिए मीटिंग ली थी। इस बात से पता चलता है कि उनकी विज्ञान में कितनी रूचि थी।

उन्होंने कहा था कि “ वह काम आपके सामने है, उसे आप पूरी लगन व हिम्मत से करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी।”
“किसी भी महान इंसान की यही पहचान है कि, वह संतुष्ट होकर घर नहीं बैठ सकता”

पुरस्कार

चंद्रशेखर वेंकटरमन रमन ने भारत का नाम देश विदेश में ऊंचा किया। उन्हें जीवन में कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। सन 1930 में उन्हें फिजिक्स में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1954 में चंद्रशेखर वेंकटरमन को भारत रत्न की उपाधि दी गई। 1957 में चंद्रशेखर वेंकटरमन को लेनिन शांति पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त भी उन्हें, उनके जीवनकाल के दौरान कई छोटे-बड़े पुरस्कार प्रदान किए गए।

रमन प्रकीर्णन या रमन प्रभाव सिद्धांत

रमन प्रभाव की व्याख्या क्वांटम आधार पर की जा सकती है। सी वी रमन यह जानना चाहते थे कि, समुद्र का पानी नीला क्यों होता है, हीरा क्यों चमकता है, साबुन के बुलबुले पर रंग क्यों दिखाई देती है, आदि कई प्रश्न उनके दिमाग में चल रहे थे, और इन्हीं प्रश्नों ने उन्हें उनकी खोज तक पहुंचाया। उन्होंने बताया कि जब प्रकाश किसी ठोस, तरल, गैस, जेल, पाउडर आदि किसी भी माध्यम से गुजरता है, तो उसकी प्रकृति और व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है।

सिद्धांत की सहायता से किसी भी वस्तु को बिना तोड़े उसके अंदर की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। इसका प्रयोग औषधि विज्ञान में, शरीर में ट्यूमर का पता लगाने, उसका सटीक इलाज करने में इसका बहुत अधिक योगदान है। इसके अतिरिक्त अपराधियों द्वारा छुपाए गए हथियारों या अन्य सामग्री का भी इससे पता लगाया जा सकता है।

हानिकारक रेडियोएक्टिव पदार्थों का उचित दूरी पर रहते हुए अध्ययन किया जा सकता है। भूगर्भ शास्त्र में इसका उपयोग किया जाता है। जमीन के नीचे पाए जाने वाले खनिजों का पता लगाया जा सकता है। ओर डी एन ए, आर एन ए का ध्यान करके रोगों का निदान किया जा सकता है, आदि बहुत से क्षेत्र है जहां पर डॉक्टर सी वी रमन द्वारा की गई खोज प्रयोग में लाई जा रही है।

आज के समय में टेक्नोलॉजी के विकास के साथ-साथ रमन प्रभाव की सहायता से कई मुश्किल कार्य आसानी से किए जा रहे हैं। खोज कार्यों में, डॉक्टरी पेशे में इस सिद्धांत का बहुत अधिक योगदान है। कार्बन नैनोट्यूब व हीरे की गुणवत्ता जांचने में इसका उपयोग किया जाता है। इस समय में इस सिद्धांत की सहायता से रक्त की जांच आदि कार्य भी बिना रक्त निकाले उसकी सटीक जांच की जा सकेगी। इस प्रकार की टेक्नोलॉजी विकसित करने पर कार्य चल रहा है।

सी वी रमन से संबंधित कुछ तथ्य

सी वी रमन का जन्म कब हुआ?
7 नवंबर 1888

सी वी रमन का पूरा नाम क्या है?
चंद्रशेखर वेंकट रमन Chandrasekhara Venkata Raman

सीवी रमन को भारत रत्न कब दिया गया?
1954 में चंद्रशेखर वेंकटरमन को भारत रत्न की उपाधि दी गई।

सीवी रमन को नोबेल पुरस्कार कब मिला था?
1930 में भौतिकी के क्षेत्र में नोबेल पुरस्‍कार से नवाजा गया था।

सीवी रमन ने किसकी खोज की?
20 फरवरी 1928 को भौतिक विज्ञान (Physics) के क्षेत्र में एक खोज की थी।

सी.वी. रमन के प्रेरक कथन/अनमोल विचार

कोई भी अनुसंधान करने में कठिन परिश्रम और लगन की आवश्यकता होती है, कीमती उपकरण कि नहीं।

मैं सबसे पहले एक भारतीय हूं और चाहे कुछ भी हो जाए, अपना देश नहीं छोड़ सकता।

उचित सवाल पूछें, और प्रकृति अपने सभी रहस्यों के द्वार खोल देगी।

मैं अपनी असफलता का मालिक हूं अगर मैं कभी असफल नहीं होता तो मैं इतना सब कुछ कैसे सीखता।

आपके सामने मौजूदा कार्य के लिए दमदार समर्पण से आप सफलता पा सकते है।

अतः सी वी रमन हिंदी निबंध मे आपको “सी वी रमन का जीवन परिचय” के बारे मे जानकारी मिल गई होगी ।

धन्यवाद

2 thoughts on “सी वी रमन का जीवन परिचय”

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